Benefits of Giloy and Side Effects in Hindi पूरी जानकारी

गिलोय (Tinospora Cordifolia) एक प्रकार की बेल है जो आमतौर पर जंगलों-झाड़ियों में पाई जाती है। प्राचीन काल से ही गिलोय को एक आयुर्वेदिक औषधि के रुप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। गिलोय के फ़ायदों (Benefits of Giloy) को देखते हुए ही हाल के कुछ सालों से अब लोगों में इसके प्रति जागरुकता बढ़ी है और अब लोग गिलोय की बेल अपने घरों में लगाने लगे हैं। हालांकि अभी भी अधिकांश लोग गिलोय की पहचान ठीक से नहीं कर पाते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गिलोय की पहचान करना बहुत आसान है। इसकी पत्नियों का आकार पान के पत्तों के जैसा होता है और इनका रंग गाढ़ा हरा होता है। आप गिलोय (Giloy in hindi) को सजावटी पौधे के रुप में भी अपने घरों में लगा सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गिलोय की बेल जिस पेड़ पर चढ़ती है उसके गुणों को भी अपने अंदर समाहित कर लेती है, इसलिए नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय की बेल को औषधि के लिहाज से सर्वोत्तम माना जाता है। इसे नीम गिलोय (Neem giloy) के नाम से जाना जाता है।

Benefits of Giloy


इनका इस्तेमाल कई आयुर्वेदि‍क दवाओं और नुस्खों में किया जाता है। इम्यूनिटी बढ़ाने में गिलोय बेहद फ़ायदेमंद (Giloy ke Fayde) होता है। गिलोय बुखार के लिए रामबाण है। यह इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में भी काम करता है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल कई बीमारियों के लिए किया जाता है। बरसात के मौसम में होने वाली वायरल बीमारियों मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया में गिलोय का सेवन किया जाता है। मच्छर से होने वाली बीमारियों में यह काफी फ़ायदेमंद है। लेकिन इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए, कब खाना चाहिए और खाने का सबसे सही तरीका क्या है।

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गिलोय मन की चिंता व स्ट्रेस को दूर करके शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। गिलोय के उपयोग से डेंगू के रोगियों के रक्त में प्लेट लेट्स की मात्रा बढती है जिससे डेंगू के रोगियों का स्वास्थ्य जल्दी ठीक होता है। गिलोय खासकर भारत के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके उपयोग और फ़ायदों के बारे में आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा इतिहास दोनों में वर्णन किया गया है। प्राचीन युग से गिलोय को कई प्रकार की बीमारियों में औषधि के रूप में उपयोग में लाया जाता रहा है।

गिलोय का सेवन कैसे करें (How to Consume Giloy):-


बुखार में गिलोय का सेवन पाउडर, काढ़ा या रस के रूप में किया जाता है. इसके पत्ते और तने को सुखाकर पाउडर बनाया जाता है. वहीं बाजार में गिलोय की गोली भी मिलती हैं. गिलोय का एक दिन में 1 ग्राम से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

कब खाना चाहिए गिलोय (When should we eat Giloy):-


किसी भी बीमारी का दवा खाने से पहले उसके फायदे और नुकसान को जानना बहुत ही जरूरी होता है. इसके अलावा किस उम्र में और कितनी मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए यह भी मालूम होना चाहिए. इस बारे में आयुर्वेद विशेषज्ञ का मानना है कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिए।

त्वचा से जुडी बीमारियाँ (Skin Diseases):-


गिलोय को सवेरे खाली पेट में घी के साथ खाने से त्वचा से जुडी बीमारियाँ दूर होती है। त्वचा से जुड़ी बीमारियाँ जैसे डर्मेटाइटिस,  सनबर्न, रिंगवर्म, लेप्रोसी और अन्य एलर्जी को गिलोय दूर करता है।

गिलोय पाचन क्रिया को बेहतर बनाये (Improve Giloy Digestion):-


गिलोय आपके पेट के सभी बीमारियों से लड़ता है। 1/2 ग्राम गिलोय के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट के सभी रोग 1ठीक हो जाते है। इसके साथ अगर आप गिलोय और शतावरी को साथ में पीस कर एक गिलास पानी में मिलाकर उबाले और जब काढ़ा आधा रह जाये तो इस काढ़े को सुबह-शाम पीयें तो इसका असर लाभदायक होगा। गिलोय का रस छाछ के साथ भी लिया जा सकता है। यह उपाय बवासीर से पीड़ित व्यक्ति के लिए उपयोग किया जा सकता है।

डायबिटीज (Giloy Benefits for Diabetes):-


विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय हाइपोग्लाईसेमिक एजेंट की तरह काम करती है और टाइप-2 डायबिटीज़ को नियंत्रित रखने में असरदार भूमिका निभाती है। गिलोय जूस (giloy juice) ब्लड शुगर के बढे स्तर को कम करती है, इन्सुलिन का स्राव बढ़ाती है और इन्सुलिन रेजिस्टेंस को कम करती है। इस तरह यह डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बहुत उपयोगी औषधि है। 

  1. खुराक और सेवन का तरीका : डायबिटीज़ के लिए आप दो तरह से गिलोय का सेवन कर सकते हैं।

  1. गिलोय जूस : दो से तीन चम्मच गिलोय जूस (10-15ml) को एक कप पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।

  1. गिलोय चूर्ण : आधा चम्मच गिलोय चूर्ण को पानी के साथ दिन में दो बार खाना खाने के एक से डेढ़ घंटे बाद लें।  

ब्लड शुगर लेवल में कमी (Reduce blood sugar level):-


जैसे की हमने आपको बताया था कि गिलोय, डायबिटीज़ के रोगियों का ब्लड शुगर कम करने में मदद करते हैं। वैसे मैं कभी-कभी ज्यादा गिलोय का सेवन करने से ब्लड शुगर कम हो जाता है जिससे चक्कर आना, उल्टी होना, जैसे साइड-इफेक्ट्स देखे जा सकते हैं। ऐसे समय में डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि इसे समय में अपने ब्लड लेवल को मेंटेन करना बहुत ही आवश्यक होता है।

गर्भावस्था या स्तनपान के समय (Pregnancy and Breastfeeding):-

गर्भावस्था या स्तनपान के समय  बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का इस्तेमाल करना बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। वैसे तो गर्भावस्था या स्तनपान के समय गिलोय के उपयोग के विषय में ज्यादा जानकारी प्राप्त नहीं किया गया है परन्तु इसका उपयोग न करना ही सही है।

 मन की चिंता को दूर करता है (Reduce Stress):-
गिलोय के पौधे के तने में से जलीय, अल्कोहल, एसीटोन और पेट्रोलियम ईथर निकलता है जो मन को आराम प्रदान करता है और Pyrrolidine की मात्रा मन को शांत करता है।

खून की कमी और रक्त विकार  (Anemia and Blood Disorders):-


गिलोय के नियमित सेवन से शरीर मे खून की कमी को पूरा किया जा सकता है।जिनके शरीर में खून की कमी है वे गिलोय के रस के साथ शहद मिलाकर सुबह – शाम सेवन करे। खून की कमी के साथ – साथ यह नुस्खा आपके खून को भी स्वस्थ रखने में मदद करेगा।

डेंगू बुखार के उपचार में  (In the treatment of dengue fever):-


गिलोय को एक पितनाशक औषधि कहा जाता है। ज्वर या जीर्ण ज्वर में गिलोय के पत्ते का काढ़ा बना कर लेने से बुखार से निजात मिलती है – बुखार में इस काढ़े को तीन समय तक प्रयोग कर सकते है।जिन लोगो को डेंगू ,चिकनगुनिया जैसे  बुखार हो एवं खून में प्लेट लेट्स भी कम हो रहे हो –गिलोय के कांड के साथ पपीते के पतों का रस मिलाकर काढ़ा तैयार करके नियमित सेवन करे। जल्द ही खून में प्लेट लेट्स की काउंट बढ़ेगा एवं रोग में भी आराम मिल जाएगा।

आँखों के लिए गिलोय के उपयोग (Giloy use for Eyes):-


गिलोय आँखो के लिए भी एक औषधि ही है। नेत्र विक़ार में भी गिलोय के अच्छे परिणाम देखे गए है | जिनकी आँखों की दृष्टि कमजोर हो वे गिलोय का सेवन करने से सब परेशानी से निजात मिल जाता है। आँखों पर गिलोय के पतों को पिस कर लगाने से भी लाभ मिलता है |.

दिल की बीमारी (Heart Disease):-


गिलोय को काली मिर्च के साथ में लेने से दिल से जुडी कोई भी बीमारी का खतरा कम हो जाता है। इसके लेने से धमनियों में खून बड़ी सरलता से बहता है जिसकी वजह से दिल पूरी तरह से सुरक्षित रहता है।

मूत्र संक्रमण में लाभदायक (Beneficial in urinary infections):-


मूत्र से जुडी कई सारी बिमारिया गिलोय के इस्तेमाल से बिलकुल ठीक हो जाती है। युरीकोरिया, केटोनूरिया, ग्ल्याकोरिया, हेमातुरिया, अल्बुमिनुरिया, डायसुरिया, क्रिस्टालुरिया, युरेथ्रितिस जैसी बीमारी ठीक हो जाती है।


गिलोय के नुकसान (Side  Effects of Giloy):-


आमतौर पर कहा जाए तो गिलोय का नुकसान न के बराबर है. वहीं कुछ मामलों में इसके सेवन करने से काफी नुक़सानदेह साबित हो सकता है. ब्लड शुगर कम होने पर गिलोय के नुकसान हो सकते हैं. यदि आपका पाचन ठीक नहीं रहता तो इसके नुकसान हो सकते हैं. गिलोय का इस्तेमाल गर्भावस्था के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं। गिलोय कब्ज और कम रक्त शर्करा की समस्या भी पैदा कर सकता है। गिलोय पाँच साल की उम्र या इससे ऊपर के बच्चों के लिए सुरक्षित है। हालांकि,गिलोय की खुराक दो से अधिक या बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं दी जन चाहिए।

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